रैना उवाच: क्लिष्ट दर्शन की एक सहज, सुबोध, प्रगीतात्मक शैली में कही कथा है, ‘सिद्धार्थ’

गजानन रैना साहित्यानुरागी है और साहित्य के अलग अलग पहलुओं  और साहित्यिक कृतियों पर बात करने का उनका अपना अलग अंदाज है। रैना उवाच के नाम से वह यह टिप्पणियाँ अपने सोशल मीडिया …

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रैना उवाच: जरायम पर रची एक सार्थक कृति है ,'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे'

रैना उवाच: जरायम पर रची एक सार्थक कृति है ,’धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’

गजानन रैना साहित्यानुरागी है और साहित्य के अलग अलग पहलुओं  और साहित्यिक कृतियों पर बात करने का उनका अपना अलग अंदाज है। रैना उवाच के नाम से वह यह टिप्पणियाँ अपने सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए दूधनाथ सिंह की रचना धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे पर लिखी उनकी टिप्पणी।

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रैना उवाच: इस सफर में नींद ऐसी खो गई हम न सोये,रात थक कर सो गई

1 सितंबर को मशहूर लेखक राही मासूम रजा का जन्मदिन पड़ता है। राही मासूम रजा जी का जन्म 1 सितंबर 1927 को गाजीपुर जिले के गंगोलीं गाँव में हुआ था। उन्हें याद करते हुए गजानन रैना ने अपने खास अंदाज में एक लेख लिखा है। आप भी पढ़िए।

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रैना उवाच: आवारा मसीहा की छवि और सामाजिक स्वीकृति की चाहत के बीच की खींचतान का नतीजा है अंतिम परिचय

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए शरत चन्द्र चट्टोपाध्य के उपन्यास अंतिम परिचय पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

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स्मृति, विस्मृति और कथ्य की पृष्ठभूमि में बजते विषाद के एक सुर की रचना है ‘द अनकन्सोल्ड’

गजानन रैना साहित्यानुरागी है और साहित्य के अलग अलग पहलुओं  और साहित्यिक कृतियों पर बात करने का उनका अपना अलग अंदाज है। रैना उवाच के नाम से वह यह टिप्पणियाँ अपने सोशल मीडिया …

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